निस्वार्थ सेवा

निस्वार्थ सेवा


निस्वार्थ सेवा

सेवा करो - सेवा करो

नम्रता - उदारता पर ध्यान दो

सेवा करो सेवा करो। 

संत महात्मा ज्ञानी पुरुष

समाज सुधारक के अनुभव सूनो 

चिंता नहीं • चितन करो

सेवा करो - सेवा करो।

समझो, क्या खोया - क्या पाया

जानो, क्या लाया- क्या लेना

मनुष्य जीवन का लक्ष्य समझो

सेवा करो - सेवा करो। 

सदा शांत मन से मनन करना

दुख सहना अपमान न करना 

कम बोलो - अधिक सुनो

सेवा करो सेवा करो।

जैसी संगत मिले-वैसी रगत होगी 

सदा अच्छी आदतों का अनुसरण करो

उचित बोलो - अनुचित त्यागो 

सेवा करो - सेवा करो।

दीपक के तले अंधेरा होता है

अधकार के बाद उजाला होता है

रोना छोड़ो मुस्कराते रहो 

सेवा करो सेवा करो।

तालमेल से जीवन सुखमय होता

प्रेमपूर्ण व्यवहार से देवता भी वश में होता 

निराशा छोड़ - आशावादी बनो

सेवा करो सेवा करो। 

नम्रता पर ध्यान दो

सेवा करो सेवा करो।।

अस्वीकरण:

उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार अभिजीत चक्रवर्ती के व्यक्तिगत विचार हैं और कश्मीरीभट्टा .इन उपरोक्त लेख में व्यक्तविचारों के लिए जिम्मेदार नहीं है।

साभार:-  बिमला कौल  एंव कोशुर समाचार  2016, फरवरी,