2026 से जन-आकांक्षाएँ शांति, प्रगति और सशक्त भारत

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2026 से जन-आकांक्षाएँ  शांति, प्रगति और सशक्त भारत

 

नववर्ष 2026 का आगमन केवल कैलेंडर की तिथि बदलने भर का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन और संकल्प का समय भी है। देश के आम नागरिक की आकांक्षा आज पहले से कहीं अधिक स्पष्ट है एक ऐसा भारत जो सुरक्षित हो, समृद्ध हो और विश्व में शांति का अग्रदूत बने । सबसे पहली और गहरी अपेक्षा यह है कि इस दशक में इस्लामी अतिवाद और आतंकवाद का निर्णायक अंत हो । बीते वर्षों में आतंकवाद ने न केवल निर्दोष जानें लीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास की गति को भी बाधित किया। 2026 से जनता यह चाहती है कि आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति और अधिक प्रभावी हो-चाहे वह सीमापार आतंक हो या देश के भीतर पनपता कट्टरपंथ । आतंकवाद किसी धर्म का प्रतिनिधि नहीं हो सकता; यह मानवता का शत्रु है। इसे जड़ से समाप्त करना राष्ट्र की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही, देश की जनता यह भी चाहती है कि भारत आर्थिक प्रगति के पथ पर निरंतर और समावेशी रूप से आगे बढ़े। कृषि, उद्योग, स्टार्ट-अप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य हर क्षेत्र में विकास केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि आम आदमी के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव लाए । रोजगार के अवसर बढ़ें, युवाओं को कौशल और सम्मान मिले, किसानों को स्थिर आय मिले और मध्यम वर्ग को आर्थिक सुरक्षा। 2026 से भारत की अपेक्षा है कि वह विकसित भारत की ओर ठोस और दृश्यमान कदम बढ़ाए । वैश्विक परिदृश्य में भी जनता भारत को एक शांतिदूत और नैतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में देखना चाहती है। युद्ध, अस्थिरता और ध्रुवीकरण से थकी दुनिया आज ऐसे राष्ट्र की ओर देख रही है जो संवाद, संतुलन और सह अस्तित्व की बात करे। भारत, में अपनी शांति सभ्यतागत विरासत और "वसुधैव कुटुम्बकम् के दर्शन के साथ हो, मानवीय मिशनों का नेतृत्व कर सकता है चाहे वह कूटनीति के माध्यम सहायता से या संयुक्त राष्ट्र के मंचों पर सक्रिय भूमिका के जरिए। इन सभी आकांक्षाओं आंतरिक सुरक्षा की पूर्ति के लिए मजबूत सीमा सुरक्षा और सुदृढ एकीकरण और अनिवार्य है। सीमाओं पर आधुनिक तकनीक, खुफिया तंत्र का चुनौतियों सुरक्षा बलों का सशक्तिकरण समय की मांग है। वहीं, आंतरिक जागरुकता से भी निपटने के लिए केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि समाज की वैचारिक स्पष्टता आवश्यक से करना है। कट्टरपंथ का मुकाबला शिक्षा, सामाजिक सुधार और साथ होगा। कानून का शासन मजबूत हो, लेकिन न्याय के भरोसे अंततः 2026 से लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि भारत भय नहीं, चले और से भारत चले विश्व जहाँ नागरिक सुरक्षित महसूस करें, विकास सबको साथ लेकर संदेश है, यही को संघर्ष नहीं, समाधान का मार्ग दिखाए। यही नए वर्ष का राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षा । से गहराई इसी व्यापक से राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में कश्मीरी पंडित समुदाय की अपेक्षाएँ भी 2026 रहा यह समुदाय जुड़ी हुई हैं। तीन दशकों से अधिक समय से विस्थापन का दंश झेल दृष्टि से देख आज भी अपने देश, अपनी मातृभूमि कश्मीर की ओर आशा भरी स्थायी पुनर्वास रहा है। कश्मीरी पंडित सरकार से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके बढ़कर एक राजनीतिक, और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अब अस्थायी राहत योजनाओं से आगे मार्गदर्शन प्रशासनिक और संवैधानिक समाधान की दिशा में जाए। रोडमैप के अनुरूप सुरक्षित, सम्मानजनक उन्हें भूमि, सुरक्षा, और सामूहिक पुनर्वास जहाँ स्वशासन, धार्मिक-सांस्कृतिक अधिकार प्राप्त स्वतंत्रता और पूर्ण नागरिक कि वर्तमान सरकार हों आज भी उनकी मूल मांग है। 2026 से समुदाय को आशा है उठाएगी और इस ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए निर्णायक कदम प्राथमिकता बनाएगी। कश्मीरी पंडितो

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साभार:-  महाराज शाह कॉशुर समाचार जनवरी 2026